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सैलाब भी उठने थे,तूफ़ान भी आना था

सैलाब भी उठने थे,तूफ़ान भी आना था

कुछ कसमें निभानी थीं,कुछ फ़र्ज़ निभाना था, दस्तूर निभाने को ,सर अपना झुकाना था. सजदा था मुकद्दर में ,सर को तो झुकाना था, सर उनका बचाने को,सर अपना कटाना था.…

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