खुद में रह कर रहे गुमशुदा उम्र भर

gazal_jinse_humko_mili_na_wafa
जिनसे हमको मिली ना वफ़ा उम्र भर,
उनको देते रहे हम दुआ उम्र भर।

ना ख़बर, ना पता, ना भरोसा मगर,
उसका देखा किये रास्ता उम्र भर।

उसके होने को महसूस करते हुए,
खुद में रह कर रहे गुमशुदा उम्र भर।

पेड़ बन कर उगे तब कहाँ था पता,
हमसे मौसम रहेंगे ख़फ़ा उम्र भर।

उसके दिल की भी हम धडकनें बन गये,
फासला हमसे जिसने रखा उम्र भर।

मुझको जलता हुआ दूर से देख कर,
तंज करती रही है हवा उम्र भर।