विंबलडन में सफलता की हैट्रिक

indians_in_wimbledon14 जुलाई। पिछले लंदन में हुए विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के डबल्स मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी छाये रहे। भारतीय खिलाड़ियों ने तीन डबल्स मेचों में जीत हासिल की। महिला डबल्स में भारत की सानिया मिर्जा और स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस, मिक्स डबल्स में भारत के लिएंडर पेस तथा मार्टिना हिंगिस, और ब्वॉयज डबल्स में भारत के सुमित नागल और वियतनाम नाम हॉन्ग ली के साथ खिताबों की हैट्रिक लगायी।

42 साल की उम्र में भी लिएंडर पेस और 28 साल की हो चली सानिया मिर्जा दोनों ही पुराने योद्धा हैं। सानिया मिर्जा ने तो विंबलडन में ऐसा खेल दिखाया जो उन्होंने कभी एकल खिलाड़ी के रूप में भी नहीं दिखाया था। साल 1999 में लिएंडर ने विंबलडन में दो खिताब जीते थे। तब उन्होंने महेश भूपति के साथ पुरूष युगल तथा मिश्रित युगल में अमरीका की लीसा रेमण्ड के साथ मिश्रित युगल का खिताब अपने नाम किया था। पेस का खेल नेट पर बेहद जबरदस्त है। उनकी चुस्ती-फुर्ती से विरोधी जोड़ी आतंकित रहती है।
पेस का यह 16वां ग्रैंड स्लैम है तो सानिया का पहला विंबलडन खिताब।

सानिया ने ही महिला युगल में विजयी शॉट लगाया। कोर्ट पर उनके बैक हैंड रिर्टन शानदार रहे जो कभी उनकी कमज़ोरी माने जाते थे।

लिएंडर और सानिया ने दोनों ने मार्टिना हिंगिस जैसी खिलाड़ी के साथ अपनी जोड़ी बनायी जो सिंगल्स में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी रह चुकी हैं। 34 साल की हिंगिस की फिटनेस और अनुभव ने ये खिताब जीतने में अहम भूमिका निभायी है।

ब्वॉयज डबल्स में सुमित नागल की कामयाबी भी सम्मानजनक रही लेकिन अभी उन्हें परिपक्व होने में चार-पांच साल लगेंगे। दरअसल एक युवा खिलाड़ी को पूरी तरह निखारने में एक-डेढ़ लाख डॉलर प्रति साल का खर्च आता है जिसे बिना किसी प्रायोजक के जुटाना आसान नहीं है। यही कारण है कि प्रतिभा होते हुए भी भारतीय खिलाड़ी पिछड़ जाते हैं।

अब जब महेश भूपति का खेल ढल चुका है तो लिएंडर और सानिया के बाद दूर-दूर तक कोई ऐसा जुझारू भारतीय खिलाड़ी नज़र नहीं आता। ऐसे में भविष्य को छोड़कर फिलहाल वर्तमान पर ही गर्व किया जा सकता है।