मीठा भी कड़वा भी टमाटर

tomatosटमाटर एक ऐसा फल/सब्जी है, जिसे सभी पसंद करते हैं। इससे कई तरह के व्यंजन भी बनाये जाते हैं, जो सेहत के लिए अति फायदेमंद होते हैं। आज से 750 वर्ष पूर्व इसे ‘जहरीला फल’ माना जाता था। इसे बाग-बगीचों में सिर्फ शोभा के रूप में उगाया जाता था। इसके फलों को ‘प्यार के सेब’ नाम से जाना था। लोग टमाटर में भरे रस को जहर समझते थे। यदि कभी भूल से इस फल को हाथ भी लग जाया करता तो लोग मिट्टी से अपने हाथ रगड़-रगड़ कर धोया करते थे।

14वीं व 15वीं सदी में अमेरिका में खूब टमाटर उगते थे। 15वीं सदी के मध्य में स्पेन का एक पादरी इसे मैक्सिको से यूरोप लेकर आया, इसके बाद से यूरोप में टमाटर का उत्पादन प्रारम्भ हुआ।

हमारे देश में टमाटर का उत्पादन पहले-पहल पुर्तगालियों द्वारा किया गया। संसार के 85 प्रतिशत भागों में इस फल की 4500 से भी अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं, जो छोटी-बड़ी व रंग-बिरंगी भी होती हैं। 18वीं सदी के उपरांत टमाटर को भोजन के रूप में खाया जाने लगा।

दक्षिण अमेरिका के जंगलों में 8 से 9 पौंड वजन के टमाटर उगते हैं। शुरू में तो ये हरे होते हैं, लेकिन पकने पर ये बैंगन की तरह नीले हो जाते हैं। इन फलों को पशु-पक्षी बड़े चाव से खाते हैं। स्पेन के जंगलों में टमाटर की लम्बी प्रजाति पाई जाती है, तथा इनका रंग कत्थई सफेद होता है। वजन में ये 300-400 ग्राम के होते हैं। इनका रस शहद की तरह मीठा होता है। इनसे मीठे-मीठे शीतल पेय बनाये जाते हैं।

अफ्रीका के ‘डोरबी जंगल’ में काले टमाटर खूब उगते हैं। इन्हें ‘काला जाम’ भी कहा जाता है। इनसे काला रंग बनाया जाता है, जो कई चीजें रंगने के काम आता है। यह एक ऐसा प्राकृतिक रंग है, जो सेहत को कभी नुकसान नहीं पहुंचाता।

मैक्सिको के पहाड़ी जंगलों में ऐसे टमाटर भी उगते हैं, जिनका वजन 5-6 किलो तक हो जाता है। शुरू में ये हरे रंग के होते हैं। पकने पर डार्क ग्रीन ब्राउन हो जाते हैं। इनका स्वाद नीबू की तरह खट्टा होता है।

तरबूज जितने बड़े टमाटर आस्ट्रेलिया के घने जंगलों में मिलते हैं। ये बड़े स्वादिष्ट होते हैं। इनके सेवन से शरीर में खून की वृद्धि होती है तथा त्वचा का रंग भी निखरने लगता है।

हिमालय पर्वत के ढलान जंगलों में टमाटर की ऐसी प्रजाति पायी जाती हैं, जो पके आम की तरह पीली होती है, लेकिन ये स्वाद में करेले की तरह कड़वे होते हैं। इनका रस पेट के कई रोगों में फायदा करता है। कोरिया में सेब के आकार जैसे टमाटर होते हैं। इनके सेवन से नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।