क्या सुषमा स्वराज ने ललित मोदी के लिए सिफारिश नहीं की थी?

sushma_lalitनयी दिल्ली, 6 अगस्त। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में कहा कि जरूर मेरा कोई अपयश का ग्रह चल रहा होगा। तभी तो मेरे साथी जो मुझे इतना स्नेह देते हैं, इतना आदर करते हैं, वो आज मेरी तीखी आलोचना कर रहे हैं। मेरा इस्तीफा मांग रहे हैं लेकिन मुझे ये भी विश्वास है कि मेरे खराब ग्रह हैं और ग्रह बहुत जल्दी टलेंगे और मेरे साथियों का सदभाव लौटेगा।

विभिन्न राजनैतिक दलों के कई नेता हैं जो सुषमाजी का सम्मान करते हैं मगर सुषमाजी का मानना है कि इन दिनों खराब ग्रह स्थिति के कारण इस्तीफा मांगा जा रहा है। असल में यदि ग्रह सुषमा विरोधी हैं तो सोनिया गांधी के पक्ष में भी नहीं हैं। यदि इन खराब ग्रहों के कारण सुषमाजी के साथ उनकी पार्टी की बदनामी हो रही है तो सोनिया जी की पार्टी की भी कम बदनामी नहीं हो रही है। शायद इन्हीं ग्रहों से संसद भी परेशान है।

वैसे विदेश मंत्री ने कहा है कि अगर चर्चा हो तो वे बाकी सवालों का जवाब भी विस्तार से देंगी तो सवाल उठता है कि विपक्ष की गैर मौजूदगी में सदन में चर्चा से पहले इस बयान की क्या जरूरत थी। क्या सरकार ने इस बयान के जरिये अंतिम संदेश दे दिया कि मानसून क्या शीतकालीन सत्र भी बर्बाद हो जाये तो क्या हमने अपनी सफाई दे दी है। यह अलग बात है कि सुषमा स्वराज मानसून सत्र के पहले दिन से आरोपों पर चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार थीं।

वैसे सुषमाजी ने यह भी कहा कि लगभग 2 माह से मीडिया के माध्यम से कुप्रचार चल रहा है। ‘‘मगर मैं शांति से बैठकर संसद के मानसून सत्र की प्रतीक्षा करती रही कि संसद का सत्र शुरू होगा, इस विषय पर चर्चा होगी और मैं हर प्रश्न का विस्तार से उत्तर दूंगी।’’

यह दीगर बात है कि सुषमा स्वराज मानसून सत्र से पहले भी ट्वीटर के जरिये इस मसले में कुछ न कुछ बयान तो दे ही रही थीं। इस मामले के सामने आते ही उन्होंने 13 जून को 12 बार ट्वीट कर कहा था कि ‘‘मानवीय आधर पर मैंने ब्रिटिश उच्चायुक्त से कहा कि ब्रिटिश सरकार को ब्रिटिश नियमों के तहत ललित मोदी की प्रार्थना पर विचार करना चाहिए। अगर ब्रिटिश सरकार यात्रा दस्तावेज देने का फैसला करती है तो हमारे संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा।’’ लेकिन फिर अपना रुख पलटते हुए 2 अगस्त को ही ट्वीट किया कि मैंने ब्रिटिश सरकार से ललित मोदी के यात्रा दस्तावेज के लिए न तो गुजारिश की और न कभी प्रस्ताव किया।

उन्होंने पहले तो खुद ही कहा कि उन्होंने ब्रिटिश उच्चायुक्त से बात की ललित मोदी की अर्जी पर विचार करना चाहिए। लेकिन लोकसभा में विदेश मंत्री कहती हैं कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहती हूं कि ये आरोप सरासर गलत है असत्य है निराधार है। मैंने कभी भी ब्रिटिश सरकार से ललित जी को यात्रा दस्तावेज देने का अनुरोध नहीं किया।

सुषमाजी ने संसद में चुनौती देते हुए कहा कि ‘‘एक कागज, एक पर्ची, एक चिट्ठी, एक ईमेल मेरे पर आरोप लगाने वाले यहां पर प्रस्तुत कर दें जिसमें मैंने ऐसा कोई भी वाक्य लिखा हो कि ललित मोदी को ट्रेवल डाक्यूमेंट दे दीजिए या आपको देने चाहिए।’’

वैसे ललित मोदी ने भी माना है कि मैंने सुषमा जी को फोन किया था, मदद मांगी थी, उन्होंने मुझ पर कृपा की थी। ललित मोदी ने यह भी कहा कि सुषमा स्वराज ने ‘आउट आफ द वे’ जाकर मेरी मदद की। एक तरफ तो सुषमाजी खुद मान रही हैं कि उन्होंने ब्रिटिश उच्चायुक्त से कहा है तो दूसरी तरफ चिट्ठी या ईमेल का प्रमाण क्यों मांग रही हैं। लोकसभा में विदेश मंत्री ने कहा कि मैंने ललित मोदी को कोई फायदा नहीं पहुंचाया। ‘‘क्या ये फायदा था कि वे अपनी पत्नी की सर्जरी के लिए सहमति पत्र पर दस्तखत कर सके।’’ वे लंदन में थे। सर्जरी के बाद लंदन आ गये।

आनंद शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस में ललित मोदी की बहुत सारी तस्वीरें भी ले आये और बताया कि 4 अगस्त 2014 को वे अपनी पत्नी को देखने लिस्बन गये तो 6 अगस्त को पर्यटन के लिए मशहूर शहर इबिजा रिसोर्ट में थे। उसके बाद वे हवाना गये फिर वेनिस गये। वे इन यात्रा दस्तावेजों पर पूरी दुनिया में भ्रमण कर रहे थे जो सुषमाजी के अनुसार ललित मोदी को अपनी पत्नी के इलाज के लिए पुर्तगाल जाने के दिये जाने थे।

सुषमा स्वराज ने कहा कि इंगलैंड के गृह विभाग ने माना है कि ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज देने में नियमों का उल्लघंन नहीं हुआ है। उधर कांग्रेस का आरोप है कि ब्रिटेन की सरकार तो नियम से ही दस्तावेज बनायेगी लेकिन उसे बनाने के लिए विदेश नीति के स्तर पर सुषमा ने छूट क्यों दी। आनंद शर्मा ने यह भी बताया कि 3 जुलाई 2014 को जब लंदन के अधिकारी ने लिखित में बता दिया कि ललित मोदी की अर्जी नामंजूर हो गयी है तो दोबारा सुषमाजी के माध्यम से प्रयास किया गया जो सफल हुआ।

ललित मोदी ने सुषमा जी से बात की और उसके बाद कीथ वाज को कहा कि भारत के विदेश मंत्री ये कहने को तैयार हैं कि भारत की सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। कागज दे दिए जायें। कीथ वाज ने पत्र के द्वारा वहां की सबसे बड़ी सीमा सुरक्षा अधिकारी जिनका काम पासपोर्ट, वीजा, यात्रा दस्तावेज देना है, उन्हें इसकी सूचना दी। उन्होंने उस पर लिखित में दिया कि सुषमा जी को इससे कोई आपत्ति नहीं है, वो इसका समर्थन करती है, मेरी उनसे बात हुई है।

आनंद शर्मा का सवाल है कि सुषमा स्वराज ने ब्रिटेन की सरकार के किसी अधिकारी के बिना पूछे अपनी प्रतिक्रिया क्यों दी थी। ब्रिटिश उच्चायुक्त से कहना कि यात्रा दस्तावेज दे दीजिए हमारे संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा क्या इससे बड़ी कोई सिफारिश हो सकती है। इस पूरे मामले की भारत के विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त को जानकारी तक नहीं थी।