मैंने गुजरात सरकार के दबाव के कारण इस्तीफा दिया था

himanshu_trivediअहमदाबाद, 6 अगस्त। 2002 के गुजरात नरसंहार की दोषी माया कोडनानी और बाबू बजरंगी को सजा सुनाने वाली न्यायाधीश को पिछले दिनों से धमकियां दी जा रही हैं। ऐसी ही धमकियों के कारण गुजरात के एक पूर्व न्यायाधीश हिमांशु त्रिवेदी ने कुछ दिनों पहले फेसबुक पर लिखा कि तत्कालीन गुजरात सरकार चाहती थी कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ फैसले दें।

हिमांशु 2002 में जिला स्तर के न्यायाधीश थे और वे अहमदाबाद के सिविल और सैशन्स कोर्ट में पदस्थापित थे। उनका कहना है कि गुजरात सरकार के दबाव के कारण उन्होंने न्यायाधीश पद से त्यागपत्र दे दिया और न्यूजीलैण्ड में बस गये।

माया कोडनानी तत्कालीन हिन्दूवादी मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के मत्रीमण्डल में थी। उन पर आरोप था कि वे नरोदा पाटिया में 97 मुस्लिमों की हत्या के लिए जिम्मेदार थी। न्यायाधीश ज्योत्सना याज्ञिक ने माया को हत्याओं और धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए 10 साल और 18 साल की सजा सुनायी थी।

इसी प्रकार बाबू बजरंगी को भी न्यायाधीश ज्योत्सना याज्ञिक ने मृत्युपर्यन्त आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। हिमांशु त्रिवेदी ने अपने फेसबुक पृष्ठ पर ज्योत्सना याज्ञिक को साहसी न्यायाधीश कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने का अफसोस है। लेकिन गुजरात सरकार ने स्पष्ट इंगित कर दिया था कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ फैसले दें। ‘‘मैं इस सब का हिस्सा नहीं बन सकता था क्योंकि मैंने भारतीय संविधान की शपथ ली थी ना कि इन ‘कसाइयों’ का साथ देने की।’’