सुषमा, कांग्रेस, ललित मोदीः हर सवाल का जवाब ही सवाल हो!

sushma_in_loksabhaसुषमा स्वराज को लेकर लोकसभा की बहस के मायने यही निकलते हैं कि अब राजनीति में आदर्श और नैतिकता के लिए कोई जगह नहीं रही। पिछले वर्षों का अनुभव यही है कि किस तरह एक राजनैतिक दल अपनी अनैतिकता को बचाने के लिए दूसरे दल की अनैतिकता पर हमला करता है। राजनीतिक दल अब इस अभियान में लग गये हैं कि हमसे बड़े चोर तुम हो।

अपने ऊपर उठे सवालों के जवाब में दूसरों पर सवाल उठाने की यह परम्परा देश के उस राजनैतिक दल ने प्रारम्भ की है, जो अलग किस्म का दल है। वैसे दोनों राजनैतिक दल एक दूसरे के जैसे हो गये हैं। कांग्रेस की नियति बीजेपी होना है और बीजेपी की नियति कांग्रेस होना है। वैसे सारे दल एक से हैं। सब बराबर हैं। राजनीति में आदर्श की मौत तो पहले ही हो चुकी थी लेकिन अब तो राजनीति की मौत भी हो चुकी है।

लोकसभा में चर्चा इस बात को लेकर थी कि सुषमा स्वराज ने ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज दिलाने के लिए सिफारिश की थी या नहीं। निश्चय ही यह चर्चा एंडरसन और क्वात्रोची को लेकर नहीं थी। चर्चा इस बात को लकर थी सुषमा स्वराज के पति और बेटी ने ललित मोदी से धन लिया या नहीं। लेकिन चर्चा का रुख इस ओर मोड़ दिया गया कि चिदंबरम की पत्नी को आयकर विभाग ने उनकी पत्नी को वकील कैसे नियुक्त किया?

सुषमा स्वराज ने बताया कि राज्य सभा में पिछली सरकार में चर्चा हुई तो चिदंबरम आसानी से बच गये। अब कौन याद करेगा कि तब बीजेपी ने चिदंबरम को आसानी से क्यों छोड़ दिया था। सुषमा स्वराज यह स्थापित करने की कोशीश कर रही थी कि मैंने तो चिदंबरम जैसी गलती की थी। जब हमने उन्हें बचकर जाने दिया तो आप भी हमें बचकर जाने दीजिये?

यदि कांग्रेस पर ललित मोदी को भगाने का आरोप है तो भाजपा पर आरोप है कि उसने उसे लंदन में बसाने में सहायता की। सुषमा से गम्भीर सवाल था कि उसने ललित मोदी की मदद क्यों की? सुषमा ने ललित मोदी की सहायता के लिए ललित की पत्नी को ढाल बना लिया। सुषमा का तर्क था कि उसने एक बीमार औरत की मदद की है। सुषमा स्वराज कहती रहीं कि अगर ये गुनाह है तो ये गुनाह किया है।

सुषमा से सवाल था कि उन्होंने सब कुछ व्यक्तिगत स्तर पर क्यों किया। वित्त मंत्रालय को या विदेश मंत्रालय क्यों नहीं बताया। सवाल यह था कि दो देशों के संबंधों की गारंटी ललित मोदी के लिए दी गयी या उनकी पत्नी के लिए। सुषमा स्वराज ने खुद ट्वीट कर बताया कि उन्होंने मदद की है लेकिन पारसाई का दावा करती रही। वे आरोप लगाने वालों से सबूत मांगती रहीं कि बताइये मैंने कब और क्या लिख कर दिया है।

भाजपा का कहना है कि ललित मोदी भगोड़ा नहीं है। यदि वो भगोड़ा नहीं है तो अभी हाल ही में उसके लिए रेड कार्नर नोटिस क्यों जारी हुआ। सुषमा से सवाल उस भगोड़े की मदद का था जो लंदन में बैठा है। जो कांग्रेसी सरकार को चकमा देकर लापता हो गया और उसके हौसले और रिश्ते को देखिये कि वह भाजपा सरकार के विदेश मंत्री को सीधा फोन कर मदद मांगता है और हमारी विदेश मंत्री उन्हें उपकृत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती। वे ब्रिटिश सरकार को आश्वस्त करती हैं कि ललित मोदी को यात्रा दस्तावेज देने पर दोनों देशों के रिश्ते खराब नहीं होंगे।

वैसे इस बात में कितनी सच्चाई है कि अरुण जेटली ने क्यों राय दी थी कि एंडरसन को भारत लाने का केस कमजोर है।

वैसे कांग्रेस न तो अपने सवालों पर टिकी रह सकी न सुषमा के सवालों का जवाब दे सकी। एंडरसन और क्वात्रोची के मामलों का कुछ जवाब तो देना चाहिए था। राहुल गांधी भी जवाब नहीं दे पाये। उल्टे कहने लगे कि सुषमा स्वराज ने बहस से एक दिन पहले उनका हाथ पकड़ कर बोला कि बेटा, तुम मुझसे ग़ुस्सा क्यों हो। राहुल ने कहा कि मैं ग़ुस्सा नहीं हूं। मैं सत्य के साथ हूं तो सुषमा जी ने नजर झुका ली। सदन में सुषमा स्वराज चुप होकर सुनती रहीं। सुषमा को बताना चाहिए था कि राहुल गांधी का हाथ क्यों थामा? क्या बेटा कहकर भावनात्मक रूप से बचने का रास्ता खोज रही थीं? क्या वाकई उनकी नजरें नीचे हुई?

सवाल के जवाब में नये सवाल उठते रहे लेकिन किसी भी सवाल का जवाब नहीं मिला। ललित मोदी को क्यों बचाया गया के जवाब में सवाल था कि एंडरसन को क्यों भगाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आपको इस बहस से दूर रखा। हालांकि कांग्रेस ने लगातार मांग की कि प्रधानमंत्री को सदन में बुलाया जाये। उनके जैसे सक्रिय राजनेता का इस बहस होना जरूरी था। लेकिन 56 इंच की छाती के मोदी इस बहस से पीठ दिखा गये। खुद सुषमा अपने आपको बचाने के लिए कांग्रेस पर वार करती रही लेकिन उनकी मुखमुद्रा से लग रहा था कि वे स्वयं अपने जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं।

कांग्रेस चाहती थी कि पहले सुषमा स्वराज का इस्तीफा हो फिर बहस हो लेकिन इस्तीफा नहीं हुआ और बहस भी हो गयी। मीडिया बहुत खुश था कि सुषमा ने बाजी जीत ली। खुद आडवानीजी ने सुषमा को बधाई दी। लेकिन किसी ने यह सवाल नहीं उठाया कि जो सवाल सुषमा स्वराज पर दागे गये थे उनके जवाब का क्या हुआ।