‘ताजमहल….’ नौकरशाही में उलझा

tajmahal_ka_udghatanपिछले 27 वर्षों से सार्थक थियेटर ग्रुप राजस्थान के कला जगत में सार्थक नाटकों के साथ जनजागृति में संलग्न है। इस दौरान सार्थक ने हर वर्ष रंग कार्यशालाएं आयोजित की और सैंकड़ों बच्चों को अभिनय की ओर प्रेरित किया। युवा रंगकर्मियों को रंगमंच के सही परिप्रेक्ष्य में उनकी क्षमताओं के साथ प्रशिक्षण देकर अभिनय के क्षेत्र में प्रवृत्त किया।

सार्थक के निर्देशक साबिर खान पिछले 4 दशकों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। सार्थक युवा रंगकर्मियों को केवल अभिनय में ही प्रशिक्षण नहीं देता अपितु इस क्षेत्र में होने वाले भटकावों से भी अवगत कराता है और उन्हें सही दिशा भी दिखलाता है। सार्थक की कार्यशालाओं में प्रशिक्षित रंगकर्मी आज दूरदर्शन और फिल्म में भी कार्यरत हैं।

सार्थक पिछले चार वर्षों से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) इन कार्यशालाओं के आयोजन में सहयोग कर रहा है जिसमें एनएसडी की फेकल्टी और एनएसडी के प्रशिक्षित रंगकर्मी सार्थक के निर्देशक साबिर खान के साथ नव रंगकर्मियों को प्रशिक्षित करते हैं। इस वर्ष भी 29 जुलाई स 25 अगस्त तक इस कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमें 37 युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

इसी कार्यशाला में ‘ताजमहल के उद्घाटन’ की तैयारी की गयी। रवींद्र मंच पर पिछले मंगलवार इस नाटक का मंचन किया गया। अजय शुक्ला लिखित इस नाटक का निर्देशन साबिर खान ने किया। अजय शुक्ला का यह नाटक उनके द्वारा ही रचित ‘ताजमहल का टेण्डर’ का सीक्वल है। ‘ताजमहल का टेण्डर’ में शाहजहां के ताजमहल का सपना नौकरशाही में उलझ कर रह गया था। इस सीक्वल में शाहजहां का पुत्र औरंगजेब ताजमहल का कार्य पूरा कर उसका उद्घाटन करने की योजना बनाता है और यह योजना भी नौकरशाही में उलझ जाती है। नाटक यह स्थापित करता है कि सत्ता में शासक आता-जाता रहता है लेकिन नौकरशाही शाश्वत है।

जहां तक नाटक की स्क्रिप्ट का सवाल है पिछले नाटक के मुकाबले कमजोर रही। ‘टेण्डर’ में जो कसावट थी वो कसावट ‘उद्घाटन’ में नहीं है। निर्देशन ने स्क्रिप्ट की कमियों को कुछ हद तक ढक लिया। यह नाटक हास्य नाटक से कहीं अधिक एक व्यंग्य नाटक है। यह नाटक भारतीय राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

अभिनय के बारे में ज्यादह कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि नये कलाकारों द्वारा प्रस्तुति में कुछ अतिरेक हो ही जाता है। अभिनेता अधिक मुखर रहे। कुछ अभिनेताओं में भविष्य की सम्भावनाएं नजर आ रही है यदि वे अपनी निरंतरता बनाये रखें। हां, जहां तक निर्देशन की बात है निस्संदेह नाटक की बंधेज पूरी थी। अभिनताओं ने मंच का पूरा उपयोग किया। हास्य उत्पन्न करने का कोई भी मौका खाली नहीं गया।

कार्यशाला में एनएसडी फैकल्टी के दौलत वैद्य ने प्रकाश व्यवस्था और सेट डिजाइन का प्रशिक्षण दिया। राजेन्द्र राव ने नृत्य, आशुतोष ने संगीत और रोहित वर्मा ने प्रशिक्षुओं को योग की शिक्षा दी। नाटक के दौरान प्रकाश व्यवस्था दौलत वैद्य ने की। संगीत संयोजन साहिल आहूजा ने किया। अभिनेताओं की वेशभूषा का डिजाइन रोशनआरा ने किया।

मंच पर औरंगजेब के पात्र को अभिनीत किया आरिफ खान ने। नौकरशाहों के चरित्र राहुल शर्मा, प्रशांत सोलंकी, पंकज शर्मा, राजपाल, मनोज, अजय चौधरी, मनीश खण्डेलवाल और मुजैद हुसैन ने निभाये। दारा शिकोह के चरित्र को शावेज खान और जफर का चरित्र अमन ने प्रस्तुत किया। भैयाजी के रोल में लव चौधरी ने प्रभावित किया।