मोदी के जवाब में नीतीश का विजन डाक्यूमेंट 2025

bihar_nitish_vision_2025पटना (बिहार), 28 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिहार को 1लाख 64000 करोड़ के पैकेज के जवाब में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगामी चुनावों के दृष्टिगत एक विजन डाक्यूमेंट 2025 प्रस्तुत किया है जिसमें बिहार के विकास का एक नया ही नक्शा सामने आया है। ऐसा लगता है कि यह विजन नीतीश अकेले का तो नहीं है। वैसे इस विजन डाक्यूमेंट में उनके सहयोगी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस का कितना हाथ है इसका भी कोई संकेत नहीं मिला। क्योंकि यह विजन डाक्यूमेंट नीतीश ने अकेले ही जारी किया है।

इस विजन डाक्यूमेंट से लगता है कि नीतीश को अब समझ आगया है कि आगे आने वाले युग में नौकरियों के लिए अंग्रेजी आवश्यक होगी है। विजन डाक्यूमेंट के अनुसार नीतीश बिहारियों को अंग्रेजी सिखाने की व्यवस्था करेंगे। यूपीए सरकार ने जिस कौशल विकास की योजना प्रारम्भ की थी और नरेन्द्र मोदी ने भी इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया अब नीतीश कुमार ने भी अपने विजन डाक्यूमेंट में इसे स्थान दिया है।

विजन डाक्यूमेंट के अनुसार बिहार के समस्त जनपद मुख्यालयों पर रोजगार परामर्श और पंजीकरण सेंटर खुलेंगे।  ब्लॉक स्तर पर कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जायेगा। जो युवा व्यापार करना चाहेंगे उन्हें सरकार पूंजी देगी। इसके लिए 500 करोड़ का एक फंड बनेगा। विश्वविद्यालयों और स्कूलों में वाई-फाई फ्री दिये जायेंगे। युवा बेरोजगारों को दो किश्तों में कुल अठारह हजार रुपये मिलेंगे जिसका इस्तमाल वे फार्म भरने, इंटरव्यू के लिए यात्रा करने में कर सकेंगे। स्किल डेवलपमेंट, वाई फाई और भत्ता वगैरह पर पांच साल में 49 हजार 800 करोड़ खर्च होगा।

12वीं पास छात्रों को राज्य सरकार एक स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड देगी। इस कार्ड से कोई छात्र उच्च शिक्षा के लिए चार लाख रुपये किसी बैंक से निकाल सकेगा। इस पर बैंक जो ब्याज लेगा सरकार उसमें तीन प्रतिशत ब्याज अपनी तरफ से भरेगी।

15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सभी स्कूलों में शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। नीतीश कुमार ने भी अपने विजन डाक्यूमेंट में बताया है कि वे हर घर में शौचालय बनवायेंगे।

बिहार एक ग्रामीण राज्य है। 89प्रतिशत जनता गांवों में रहती है और 76प्रतिशत खेती पर निर्भर है। इनके लिए नीतीश कुमार ने अपने विजन डाक्यूमेंट में कई प्रावधान किये हैं। नीतीश कहते हैं कि बिहार के गांवों को आज भी 15-16 घंटे बिजली मिल रही है। खेती के लिए किसानों को अलग से कनेक्शन दिया जा रहा है। 2014 में बिहार के सभी जिलों में मिट्टी जांच की प्रयोगशाला स्थापित की जा चुकी थी। 2010-15 के बीच करीब साढ़े दस लाख खेतों की मिट्टी की जांच कर उनके लिए आवश्यक दस्तावेज किसानों को दिये जा चुके हैं ताकि वे अपने खेतों की उर्वरता के अनुसार फसल उगा सकें।

बिहार गरीबी के मामले में पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार     2005 से अब तक 26 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ चुके हैं। पिछले वर्षों जिस प्रकार बिहारी मजदूरों के बिहार से पलायन में कमी आयी है नीतीश का यह दावा झूठा भी नहीं लगता। बिहार में 33.7 प्रतिशत लोग अभी भी गरीबी रेखा से नीचे हैं।

विकास के दो ही आधार हैं। कृषि और उद्योग। कृषि क्षेत्र में विकास पानी और बिजली की उपलब्धता से ही हो सकता है। पानी के लिए प्रकृति पर निर्भर रहना पड़ता है। वैसे पानी की व्यवस्था तालाबों, बांधों और नहरों का निर्माण कर भी की जा सकती है। लेकिन यह काम सरकार का है। बिजली की इंतजाम भी सरकार ही करती है। फसलों के नष्ट होने पर सरकार ही मुआवजे देती है। निश्चय ही बिहारियों के पलायन रुकने के पीछे बिहार में खेती का विकास एक बड़ा कारण प्रतीत होता है।

नीती आयोग के आंकड़ों के अनुसार गरीबी के मामले में छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है। यहां 39.9 प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे हैं। झारखंड में 36.9 प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे हैं। उड़ीसा में 32.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 31.6 प्रतिशत हैं।

इन चारों राज्यों में देश के औसत 21.9 प्रतिशत से कहीं ज्यादा गरीबी है। अगर किसानों और उनकी खेती की ओर इन चारों राज्यों की सरकारों का ध्यान गया होता तो निश्चय ही वहां से पलायन रुक जाता और इन राज्यों में भी एक बड़ा प्रतिशत गरीबी के रेखा से ऊपर आजाता।

विजन डाक्यूमेंट के अनुसार बिहार की 39,000 बस्तियों में से 36000 में बिजली पहुंच चुकी है। प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 2012 में 145 किलोवाट थी जो अब बढ़कर 203 किलोवाट हो गयी है। इसके अनुसार बिहार का आम आदमी बिजली का इस्तेमाल कर रहा है। प्रति व्यक्ति खपत में बिहार में 40 प्रतिशत का उछाल आया है जबकि पूरे पूर्वी क्षेत्र में 3 प्रतिशत का ही उछाल हुआ है।

नीतीश का वादा है कि 2016 के अंत तक राज्य की बाकी 3000 बस्तियों तक बिजली पहुंच जायेगी और फिर हर घर में गरीब से गरीब को भी सरकार अपने खर्चे से बिजली का कनेक्शन देगी। इस पर 55,600 करोड़ का खर्च आयेगा।

पिछले दिनों नरेन्द्र मोदी बिहार में भाषण करते समय इस बात को जोर देकर कहा था कि बिहार में मेडिकल कॉलेजों की कमी के कारण बिहार के छात्रों को पढ़ने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। नीतीश कुमार ने अपने विजन डाक्यूमेंट में इस बात का ध्यान रखा है। नीतीश ने कहा कि बिहार में पांच मेडिकल कॉलेज बनायेंगे। दस साल के राज में बिहार में सिर्फ तीन मेडिकल कॉलेज बने थे।

नीतीश ने महिलाओं को पंचायतों में पचास फीसदी, शिक्षकों और पुलिस की नियुक्ति में 35 फीसदी आरक्षण दिया था अब इसे सभी सरकारी नौकरियों में लागू करना चाहते हैं।

गुजरात में सरकारी नौकरियों में महिलाओं का 1997 से 30 प्रतिशत आरक्षण था जिसे अक्टूबर 2014 में बढ़ाकर 33 फीसदी किया गया। नीतीश गुजरात से दो फीसदी ज्यादा आरक्षण दे रहे हैं।

अपने विजन डाक्यूमेंट में सारे लक्ष्यों को पूरा करने में 2 लाख सत्तर हजार करोड़ का अनुमान बताया है। बिहार सरकार के वित्त विभाग की वेबसाइट के अनुसार वर्ष 2015-16 में योजनाओं का कुल खर्चा 57,138 करोड़ रुपये का है। इस हिसाब से अगले पांच साल में सरकार 2 लाख 87 हजार करोड़ खर्च कर सकती है। इस हिसाब से नीतीश का दावा फर्जी तो नहीं लगता क्योंकि विजन डाक्यूमेंट के अनुसार अगले पांच साल में 2 लाख सत्तर हजार करोड़ ही खर्च किये जायेंगेे।

विकास के दूसरे कारक उद्योग के बारे में विजन डाक्यूमेंट में कोई बड़े वादे नहीं किये। एक सच्चाई को जरूर स्वीकार किया है कि मई 2015 तक मंजूरशुदा 2078 प्रोजेक्ट में से 306 शुरू हुए हैं और 7560 करोड़ का निवेश हुआ है। उद्योगों के विकास के लिए विज़न डाक्यूमेंट में नीतीश ने बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग की है।