‘शानदार: विकास बहल कहां है?

shandaar‘शानदार’ के निदेशक विकास बहल हैं, ऐसा टाइटल्स में बताया गया है। प्रचारित भी यही किया गया है। यदि यह फिल्म वाकई विकास बहल ने निर्देशित की है तो लगता है कि निश्चय ही ने ‘क्वीन’ किसी और ने बनायी थी। यदि ‘क्वीन’ विकास बहल की थी तो यह खोज का विषय है कि ‘शानदार’ के साथ विकास बहल का नाम क्यों है।

फिल्म में आलिया भट्ट हैं जो काफी हंसमुख और उन्हें नींद न आने की बीमारी है। आलिया की शाहिद से मुलाक़ात होती है जो उसे सुला सकता है। आलिया के पिता का किरदार अदा किया है, पंकज कपूर ने जो इस बात से असहज महसूस करते हैं कि उनकी बिटिया बड़ी हो रही है और अपने लिए जीवन साथी खुद तलाश लेगी। एक पुरानी कहानी थी जिसमें राजकुमारी सोती रहती थी। यहां ‘राजकुमारी’ जागती रहती है।

ये एक डेस्टिनेशन वेडिंग फिल्म है। यह डेस्टिनेशन कहां है कोई नहीं जानता। इसमें दिल्ली वाली दो लड़कियां हैं जो एसएमएस की भाषा में बात करती हैं। इसमें मोटी दुल्हन है जो अपनी मां से डरती है। आलिया बहन की भूमिका में हैं। नानी (सुषमा सेठ) और भी ‘खतरनाक’ है। साढ़े आठ पैक वाला दूल्हा है जिसका आईक्यू गड़बड़ है। एक सिंधी भाई है जो संजय कपूर बने हैं। शायद याद हो आपको, ये अनिल कपूर के भाई हैं।  शादी दो कारोबारी परिवारों में होनी है।

कोई फिल्म अपने अलग-अलग पहलुओं में लगातार बेतुकी और मूर्ख दिखती हो तो दर्शक भी उसे ज्यादा परवाह किये बिना बस देख लेता है। इस हिसाब से ये फिल्म मजेदार कही जा सकती है जिसके किरदारों में मूर्खता भरी है।

यदि यह स्वीकार कर लिया जाये कि यह एक बेमतलब फिल्म है तो ये फ़िल्म कभी कभी मजेदार लग सकती है। पंकज कपूर जैसे मंजे हुए अभिनेता बेतुके हाव-भाव करते हैं। संजय कपूर को अभी भी अभिनय सीखने की जरूरत है। आलिया के लिए शाहिद की उमर कुछ ज्यादा लगती है।
इस फिल्म को देखने के पहले ये तथ्य स्वीकार कर लिये जायें तो कुछ देर के लिए ही सही फिल्म बर्दाश्त के लायक है।

वैसे शहिद और आलिया को ही देखना है तो फिल्म के जरूर देखिये।