Home » 2015 » October (Page 17)

वो अंतिम मोड़ था इस ज़िन्दगी का

वो अंतिम मोड़ था इस ज़िन्दगी का

पता मुझको मिला बस दुश्मनी का, बढ़ाया हाथ जब-जब दोस्ती का। भला मुझमें कोई कैसे ठहरता , नहीं था मैं ही शायद घर किसी का। पतंगों की फ़कत लाशें मिली…