चार्ली के चक्कर में: रहस्य कथा

charlie_ke_chakkar_meइस फिल्म की शुरुआत एक बेहद हॉट गीत से शुरू होती है। टाइटल्स से ही साफ होने लगता है कि फिल्म में रहस्य, ड्रग्स, माफिया, दोस्ती-दुश्मनी, नशे की दुनिया के काले सच-झूठ और एक कत्ल से पर्दा उठने वाला है।

ये सब इतना आकर्षक लगता है कि बांड सीरिज के टाइटल्स याद आने लगते हैं। शुरुआती दृश्य जो कि एक खुफिया कैमरे की रिकॉर्डिंग पर आधारित हैं, में युवक-युवतियों को नशे की गिरफ्त में दिखाया गया है।

नशे की दुनिया में चार्ली कोकीन को कहा जाता है, जिसके इर्द-गिर्द फिल्म का ताना-बाना बुना गया है। ये सब काफी असल ढंग से फिल्माया गया है। फुटेज कहीं-कहीं बहुत खराब है और पार्श्व संगीत भी। बावजूद इसके ये सब बांधे रखता है। इस उत्सुकता के साथ कि आखिर इस वीडियो फुटेज में जिन युवक-युवतियों का कत्ल हुआ है, उनके साथ हुआ क्या था।

फिल्म की कहानी एक ड्रग एजेन्ट हुसैनी (विकास आनंद) के कत्ल से शुरू होती है। एसीपी संकेत पुजारी (नसीरूद्दीन शाह) को मामले की जांच सौपी जाती है, जो एक जांच अधिकारी समीरा पवाते (औरोशिखा डे) की मदद से छानबीन को आगे बढ़ाता है। पुलिस को कुछ वीडियो फुटेज मिले हैं, जिसमें आधा-अधूरा सा, धुंधला-सा ब्यौरा है। कई घंटों की फुटेज खंगालने के बाद पता चलता है कि नशे के आदि दीपक (आनंद तिवारी), नीना (मानसी राछ), पैटी (आंचल नंद्रजोग) और जीवन उर्फ जीव्स (निशांत लाल) ड्रग की एक बड़ी डील का हिस्सा हैं। और ये भी सामने आता है कि सैम (अमित सिआल) इस पूरे अपराध दृश्य का सूत्रधार है जो कि एक ड्रग सप्लायर है। फुटेज के मुताबिक ये सब लोग मर चुके हैं। वीडियो में दिख रहा एक ड्रग डीलर राहिल (सनम सिंह) भी जो एक लड़की हेरा (दिशा अरोड़ा) की मदद से इन लोगों तक पहुंचता है। राहिल भी एक सड़क दुर्घटना में मर चुका है।

charlie_ke_chakkar_me_1जीवित एक है तो सिर्फ दो लोग। इनमें से एक है सोहेल (सुब्रत दत्ता) जो राहिल का प्यादा है और मुख्य रूप से जब्बार (सिराज मुस्तफा) के लिए काम करता है और दूसरी है हेरा जो कि फुटेज मिलने के बाद से लापता है। आगे की जांच में पुजारी को ये भी पता चलता है कि सोहेल और जब्बार के तार हुसैनी के जरिये दुबई के एक डॉन अजमत खान से जुड़े हैं। ड्रग का वो बड़ा जखीरा अजमत का ही था, जिसकी डिलीवरी हुसैनी लेने लगा था। ये पूरा मामला बेहद पेचीदा साबित होता है, जब सोहेल पूछताछ में पुजारी को कुछ और ही राज पता चलते हैं। पुजारी और समीरा ये जान कर सन्न रह जाते हैं कि ये सारी फुटेज किसी खास मकसद के लिए बनायी गयी थी, जिसे जीवन ने हंसी-मजाक में बिना किसी को बताये शूट किया था।

फिल्म का कथानक काफी पेचीदा है। बहुत सारे किरदार हैं और इंटरवल से पहले ज्यादातर फिल्म फुटेज पर आधारित होने की वजह से बांध नहीं पाती। पर उत्सुकता लगातार बनी रहती है। उत्सुकता की एक बड़ी वजह नये कलाकारों का अभिनय भी है, जिसे उन्होंने बिनी किसी हिचकिचाहट के परदे पर पेश किया है। ये फिल्म दो बातें कहती है। पहली तो ये कि नशे के आदि युवक-युवतियां किस तरह से माफिया के चंगुल में फंस जाते हैं।
वो अगर इस पचड़े में न भी पड़े तो फंसते, और फंसते चले जाते हैं। और दूसरी ये कि ड्रग माफिया बिना पुलिस की मिलीभगत के इतनी आसानी से काम नहीं कर सकता। लेकिन निर्देशक मनीष श्रीवास्तव का अंदाज पूरी मुस्तैदी के साथ आत्वमविश्वास नहीं जगाता दिखता।

बेशक, इस पूरी कहानी में बहुत सारे हिचकोले हैं, दांव-पेंच है, जो कई जगहों पर बांधे रखते हैं और मनोरंजन प्रदान करते हैं। पर ये सब नाकाफी-सा लगता है, जब पता चलता है कि इस पूरे मामले में किसका हाथ था। थोड़ी हंसी भी आती है, जब पता चलता है कि ‘कातिल कौन’ का यह मामला दरअसल, एक बड़ा गेम है, जिसके सूत्र कहानी के किरदारों में नहीं, बल्कि लेखक की कलम में छिपे हैं।

charlie_ke_chakkar_me_2फिल्म की कहानी में कोई खास नयापन नहीं दिखता। इसे जरूरत से ज्यादा पेचीदा बना दिया गया है। लेकिन नए कलाकारों ने ठीक-ठाक काम किया है। खासकर अमिल सिआल, आनंद तिवारी, मानसी राछ और दिशा अरोड़ा ने। नसीरूद्दीन शाह लंबे समय बाद सोलो रोल में दिखे हैं। एक तेज तर्रार एसीपी का किरदार उन पर फबता है। उनके हाव-भाव बेहद शांत और रहस्यमयी से लगते हैं। उनकी आवाज में एक ठहराव और घमक लगती है। लेकिन फिल्म के क्लाईमैक्स में वह एक सुपरकॉप की जगह एक ‘बॉलीवुड हीरो’ की नजर आते हैं, जिसे हम पहले भी सैंकड़ों बार देख चुके हैं।

अगर आप इस पेचीदा कथानक और नए कलाकारों से सजी फिल्म का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो इसे काफी चौकन्ना हो कर देखना पड़ेगा।