यह हार ‘‘एक नेता के अवसान का संकेत करती है।’’

बिहार चुनावों के पहले से ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर अपने केन्द्रीय नेतृत्व के प्रति नाराजगी थी। पार्टी का आम कार्यकर्ता क्षुब्ध था कि ना तो कोई नेता उनकी बात को तवज्जो देता है नाही उनके नेताओं की मोदी, शाह और जैटली की तिकड़ी के आगे कुछ चलती है। यहां तक कि कई केन्द्रीय मंत्री इस तिकड़ी के आगे अपने को असहाय पाते हैं। सच्चाई तो यह है कि वे अर्दली बन कर रह गये हैं। लकिन उनकी हिम्मत नहीं कि वे मादी के आगे कुछ बोल सकें।

लेकिन बिहार विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त के बाद पार्टी के चार बड़े नेताओं, वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी, पूर्व मंत्री और पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, सीनियर पत्रकार और भाजपा सांसद चंदन मित्रा तथा बिहार के सांसद आर के सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाये हैं।

arun_shouriअरुण शौरी ने बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की करारी हार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली को जिम्मेदार बताया है। अरुण शौरी का कहना था कि इस वक्त बीजेपी और सरकार का मतलब सिर्फ़ मोदी, अमित शाह और अरुण जेटली है क्योंकि यही तीनों हैं जो सरकार चला रहे हैं। उन्होंने बिहार की हार को बीजेपी के चेहरे पर जनता का करारा तमाचा बताया। उनका मानना है कि पार्टी में अहंकार आ चुका है और ये हार उसी का नतीजा है। अरुण शौरी ने कहा कि मोदी सारे देश को जीत लेना चाहते हैं लेकिन करते कुछ नहीं।

shatrughna_sinhaभाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की उनकी ही पार्टा ने पिछले कुछ समय से भारी उपेक्षा की है। वे पार्टी के रवैये से काफी नाराज हैं। उन्होंने महागठबंधन की जीत को ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया और पार्टी के शीर्ष नेताओं पर यह कहते हुए कटाक्ष किया कि ‘बिहारी के मुकाबले बाहरी’ के मुद्दे का हमेशा के लिए समाधान हो गया है।

शत्रुघ्न ने अपने कई ट्वीट में कहा, ‘‘लालू जी और नीतीश जी को बिहार चुनावों में जीत के लिए बधाई। हम जनता के जनादेश के आगे सिर झुकाते हैं। यह लोकतंत्र और बिहार की जनता की जीत है। मैं उन्हें सलाम करता हूं।’’ शत्रुघ्न सिन्हा ने एक अन्य ट्वीट में पार्टी नेतृत्व को सलाह दी, ‘‘आत्मावलोकन, परिवर्तन, भविष्य में बेहतर रणनीति, टीमवर्क और समन्वय आज के दिन की मांग है। ’

chandan_mitraचंदन मित्रा ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि महागठबंधन का नरम प्रचार और नीतीश कुमार को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का उसका दांव काम कर गया। मतदाताओं ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की ओर से बनाये गये आक्रामक प्रचार को खारिज कर दिया।’ मित्रा ने यह भी कहा कि बिहार में एक मजबूत पार्टी नेतृत्व तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘जाति से जाति के मिलान के प्रयास में भाजपा के रणनीतिकार अपनी गणना में गलती कर बैठे।’

rk_singh_iasबिहार से भाजपा सांसद आर के सिंह ने कहा कि आत्ममंथन होना चाहिए और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सिंह ने चुनाव से पहले पार्टी के टिकट वितरण की आलोचना की थी। नौकरशाह से राजनेता बने आर के सिंह ने कहा, ‘‘आत्ममंथन होना चाहिए। इसकी जांच होनी चाहिए कि कहां गलती हुई।’’ उन्होंने भाजपा के टिकट वितरण पर कहा, ‘‘यह सोचने का नहीं बल्कि एक तथ्य है। जाइये और जांच कर लीजिये। जिन लोगों के खिलाफ डकैती जैसे अपराधों के लिए आरोपपत्र दाखिल किये गये थे उन्हें टिकट दे दिये गये। यह कुछ ऐसा था जिसकी मुझे अपनी पार्टी से उम्मीद नहीं थी।’’

उधर एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने जदयू नेता नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए उन्हें ‘महानायक’ बताया। शिवसेना ने परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह हार ‘‘एक नेता के अवसान का संकेत करती है।’’