हिट एंड रन केस में सलमान को राहत की सम्भावना

salman_hit_run_caseमुम्बई, 9 दिसम्बर। हिट एंड रन मामले में अभिनेता सलमान खान की अपील पर न्यायमूर्ति एआर जोशी ने बुधवार को भी अदालत का फैसला लिखवाने का काम जारी रखा। कोर्ट अपना फैसला गुरूवार को सुनायेगा। इस केस में मुंबई सेशंस कोर्ट ने सलमान को 5 साल की सजा सुनायी थी। जिसके खिलाफ सलमान ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें अपील का निपटारा होने तक जमानत दी हुई है। दरअसल, सलमान खान ने सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई पिछले सप्ताह पूरी हुई थी। सोमवार को भी इस मामले पर सुनवाई हुई जो आज भी जारी है।

साल 2002 हिट एंड रन केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि हादसे के वक्त सलमान खान के नशे में होने और गाड़ी चलाने के सबूत नहीं मिले हैं। कोर्ट ने साल 2002 के हिट एंड रन केस में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के पूर्व पुलिस अंगरक्षक और गवाह रवींद्र पाटिल की गवाही पर भी संदेह जताया और कहा कि उन पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता।

न्यायमूर्ति ए आर जोशी ने इस मामले में मुंबई की एक सत्र अदालत द्वारा इस साल छह मई को पांच वर्ष की जेल की सजा सुनाये जाने के खिलाफ अभिनेता द्वारा दाखिल की गयी याचिका पर फैसला लिखवाते समय यह बात कही।

दुर्घटना के कुछ घंटे बाद ही पाटिल ने 28 सितंबर, 2002 को इस बाबत एफआईआर करायी थी। अपनी एफआईआऱ में उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया था कि सलमान नशे की हालत में कार चला रहे थे या नहीं।

हालांकि एक अक्तूबर, 2002 को सलमान के खून जांच की रिपोर्ट आने के बाद पाटिल ने एक मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान दिया कि सलमान ने उस रात शराब पी थी और उन्होंने गाड़ी को तेज गति से चलाने को लेकर अभिनेता को चेताया था कि लेकिन सलमान ने उनकी बात पर गौर नहीं किया।

न्यायाधीश ने कहा कि पाटिल की गवाही संदेह के घेरे में है क्योंकि जब बाद में उनका बयान दर्ज किया गया तो उसमें उन्होंने फेरबदल किया। लगातार तीसरे दिन अदालत में फैसला लिखवाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि इसको देखते हुए, उनकी (पाटिल की) गवाही पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया जा सकता।

वकीलों, पत्रकारों और कानून के छात्रों से भरी अदालत में न्यायमूर्ति जोशी ने कहा कि उनके बयान को आंशिक तौर पर विश्वसनीय माना जा सकता है। रवींद्र पाटिल की वर्ष 2007 में मौत हो गयी थी और वह सत्र अदालत में ट्रायल के समय उपलब्ध नहीं थे। सलमान अदालत नहीं आये लेकिन उनकी बहन अलविरा खान-अग्निहोत्री मौजूद थीं।

सोमवार को सत्र न्यायालय के फैसले तथा अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलों पर गौर करने के साथ-साथ हर पेंच पर ध्यान देते हुए अदालत ने कहा कि मसलन, सलमान खान रेन बार में गये थे, यह तो साबित होता है, लेकिन सलमान को उस रात किसी ने भी शराब पीते हुए नहीं देखा था। इसके अलावा, होटल के बिल की तारीख को लेकर भी उलझन है, क्योंकि पुलिस ने 27 सितंबर का बिल पेश किया, लेकिन सलमान जब वहां से निकले, तब तारीख बदल चुकी थी।

वैसे, सलमान खान खुद गाड़ी चला रहे थे, इस पर भी भ्रम बरकरार है, क्योंकि किसी ने सलमान खान को गाड़ी चलाते नहीं देखा था। गवाह नंबर 8 ने कहा था कि कार में चार लोग थे, और इसके बाद अभियोजन पक्ष ने उसे क्रॉस एक्ज़ामिन नहीं किया, जो होना चाहिए था। जैसे – हादसे के बाद दर्ज एफआईआर में सलमान खान के शराब पिये होने की बात नहीं लिखी गयी थी, और वह आरोप कुछ दिन बाद जोड़ा गया। जैसे – गवाह नंबर 7 ने क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के दौरान कहा था कि उस समय सलमान खान के मुंह से शराब की बू नहीं आ रही थी, और वह लड़खड़ा भी नहीं रहे थे। जैसे – सलमान खान ने उस रात शराब पी थी या नहीं, इसकी जांच के लिए ब्लड सैम्पल लेने से पहले सलमान की सहमति जरूरी थी, लेकिन फॉर्म पर सलमान के दस्तखत नहीं पाये गये।