“असहिष्णुता अपने आप में एक तरह की हिंसा है’’- मोहन दास करमचंद गांधी

intolerance-4अतुल्य भारत अभियान के ब्रांड एंबेसेडर मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने पर्यटन मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी और पर्यटन मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की कि अब बॉलीवुड एक्टर आमिर खान ‘अतुल्य भारत’ कैंपेन के ब्रांड एंबेसेडर नहीं हैं। ‘अतुल्य भारत’ अभियान से एक्टर आमिर खान के हटने के बाद प्रसिद्ध बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन इस अभियान का नया चेहरा बनने के लिए मोदी सरकार की पहली पसंद माने जा रहे हैं। अमिताभ गुजरात पर्यटन के ब्रांड एंबेसेडर भी हैं।

‘अतुल्य भारत’ विज्ञापन कैंपेन चलाने वाली कंपनी का कहना है कि वह इस विज्ञापन के लिए किसी महिला को लेना चाह रहे थे। इसका कारण उन्होंने निर्भया मामले के बाद भारत के पर्यटन को हुए नुकसान से उबारना बताया। कंपनी का कहना है कि वह इस कैंपेन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के नाम पर विचार कर रहे थे। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय की दखल के बाद सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के नाम का प्रस्ताव रखा गया। सूत्रों की मानें तो अमिताभ बच्चन के नाम पर स्वीकृति बन चुकी है, केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। पर्यटन मंत्रालय द्वारा आमिर खान को ‘अतुल्य भारत’ कैंपेन के ब्रांड एंबेसेडर के तौर पर हटाये जाने के बाद आमिर खान ने बयान जारी कर इसका कारण कैंपेन की कॉन्ट्रैक्ट अवधि का खत्म होना बताया था।

आमिर ने इस बारे में बयान देते हुए कहा था कि, ‘‘मेरे लिए यह बहुत सम्मान और खुशी की बात है कि मुझे 10 साल से ‘अतुल्य भारत’ कैंपेन के साथ ब्रांड एंबेसेडर के तौर पर जुड़ने का मौका मिला। अपने देश की सेवा करने लिए मैं बेहद खुश हूं और हमेशा इसके लिए उपस्थति रहूंगा। मैं यहां एक और बात स्पष्ट करना चाहूंगा कि मैंने अब तक जितनी भी सामाजिक सेवा से संबंधित फिल्में की हैं उनके लिए मैंने कोई पैसा नहीं लिया है, क्योंकि देश की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है और हमेशा रहेगी। ये सरकार का अधिकार है कि वे अपने कैंपेन के लिए किसे ब्रांड एंबेसेडर रखना चाहते हैं। मुझे इस सेवा से मुक्त करने के सरकार के निर्णय का मैं सम्मान करता हूं। मुझे विश्वास है कि वह वही कदम उठायेंगे जो देश के लिए बेहतर हो। चाहे मैं ब्रांड एंबेसेडर रहूं या ना रहूं, लेकिन भारत हमेशा अतुल्य रहेगा।’’

बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान आजकल विवादों में घिरे होने के साथ-साथ तमाम मुसीबतें भी झेल रहे हैं। एक लम्बे अरसे तक ‘अतुल्य भारत’ कैम्पेन के एंबेसडर रहे आमिर को हाल ही में इस कैम्पेन से हटा दिया गया। अंग्रेजी अखबार ‘द टेलीग्राफ’ की खबर के मुताबिक, ‘असहिष्णुता’ वाले विवाद के चलते एक बड़े सड़क सुरक्षा कैम्पेन से भी आमिर को हटा दिया गया। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कहने पर इस रोड सेफ्टी कैम्पेन के ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर आमिर को दिसंबर 2014 में अनुबंधित किया गया था।

सड़क परिवहन मंत्री गडकरी ने टीवी शो ‘सत्यमेव जयते’ पर ‘रोड एक्सीडेंट या मर्डर्स’ नाम से एक एपिसोड देखने के बाद खुद आमिर से बात की थी। गडकरी के ऑफिस के एक सूत्र के अनुसार, ‘‘मंत्री जी को लगा था कि उस एपिसोड के लिए उम्दा रिसर्च की गयी थी। वो आमिर खान द्वारा अपने कार्यक्रम में ऐसे सामाजिक मुद्दे उठाने से काफी प्रभावित थे। जब देशभर में सड़कों पर सुरक्षा को लेकर जागरुकता फैलाने का अभियान चलाने की बात उठी, तो आमिर इसके लिए सर्वाेत्तम पसंद थे।’’

गौरतलब है कि पिछले नवम्बर को आमिर ने एक अवॉर्ड्स इवेंट के दौरान देश में व्याप्त असहिष्णुता पर टिप्पणी की थी। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी पत्नी किरण राव ने पूछा था कि ऐसी स्थिति में अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या हमें यह देश छोड़ देना चाहिए। यह सवाल था। किसी टीवी एंकर ने आमिर से यह नहीं पूछा कि उन्होंने क्या जवाब दिया। इस बात पर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता आगबबूला हो गये थे। इस घटना के तुरंत बाद ही पर्यटन मंत्रालय ने फैसला लिया कि अब वो मैक्केन एरिक्सन (जो आमिर खान को लेकर ‘अतुल्य भारत’ के विज्ञापन बना रहे थे) के साथ अनुबंध आगे नहीं बढ़ायेगी।

 

आमिर ने क्या कहाः

I also feel that there is a sense of insecurity, there is sense of fear.
In last 6-8 months there is a growing sense of despondency.
For the first time Kiran said should we move out of India? That is a disastrous and big  statement of Kiran to make to me. She fears for the child. She fears for the atmosphere around us.
That indicates that there is a sense of growing disquiet, there is a sense of growing despondency apart from alarm. One part is alarm, another part is you feel depressed, you feel low.

intolerance-2असहिष्णुता 2015 का काफी चर्चित शब्द रहा, और हर मंच पर इसका भरपूर इस्तेमाल भी हुआ। कभी कोई साहित्यकार बोला तो कभी कोई नेता और कभी सितारे। आमिर खान और शाहरुख खान ने भी इस शब्द का इस्तेमाल किया था। देश के इन चहेते सुपरस्टार्स ने जब कहा कि भारत असहिष्णु होता जा रहा है तो देश के सभी तथाकथित सहिष्णु लोगों के सब्र का बांध टूट गया और वे असहिष्णु हो गये। असहिष्णु भी ऐसे-वैसे नहीं, मुट्ठियां ताने हुए, गुस्से में लाल आंखें लिये हुए और इन असहिष्णु शब्द का इस्तेमाल करने वालों को सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने को तैयार।

बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने नवंबर 2015 में इंटरव्यू में भारत में असहिष्णुता बढ़ने की बात कही और फिर उसके बात तो हंगामा ही हो गया। उन्होंने बात को रफा-दफा करने की कोशिश भी की। कुछ संगठनों ने उन्हें सबक सिखाने का बीड़ा उठा लिया। 18 दिसंबर को उनकी फिल्म ‘दिलवाले’ आने वाली थी, तो व्हाट्सऐप पर मैसेज चलने लगे और कहा गया कि शाहरुख की फिल्म न देखें । सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी सहिष्णु बंधु जनों ने इसी तरह का अभियान छेड़ दिया। जब फिल्म रिलीज हुई तो कई जगह उसके शो रद्द करने पड़े और कई जगह पर और भी हंगामा हुआ। वैसे भी फिल्म में कोई दम तो था नहीं, लेकिन इस सारी कवायद ने फिल्म पर और कुठाराघात किया। सहिष्णु लोगों ने शाहरुख खान के लिए असहिष्णुता का माहौल बना डाला।

नवंबर का ही महीना था, और आमिर ने भी असहिष्णुता की बात की। तथाकथित सहिष्णु देशभक्तों ने फिर मुट्ठियां तान लीं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आमिर का ही नहीं बल्कि उन प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने के लिए कहा गया जिनका वे प्रचार करते थे। उनके झापड़ रसीद करने की सुपारी भी दे डाली गयी। फिर वह सब हुआ जो अक्सर बहुत ही सहिष्णु लोग असहिष्णु लोगों के खिलाफ करते हैं। मास्टरस्ट्रोक बाकी था जो अब सामने आ चुका है। आमिर खान को ‘अतुल्य भारत’ कैंपेन के ब्रांड एंबेसेडर के तौर पर हटा दिया गया है। कहा जा रहा है कि उनका कॉन्ट्रेक्ट पूरा हो गया था। किसी को सरकारी कैंपेन का ब्रांड एंबेसेडर बनाने का विशेषाधिकार सरकार के ही पास है। इस बात का सम्मान करते हुए आमिर ने भी सरकार के इस फैसले को बहुत ही सहिष्णुता से गले लगा लिया है ।

लेकिन इतिहास बन चुके अब इन पन्नों से सबक मिल चुका है कि असहिष्णु बनकर किस तरह से सहिष्णुता का पाठ भी पढ़ाया जा सकता है। यह हमने एक बार नहीं, बार-बार देखा। यहां महात्मा गांधी की इन पंक्तियों “असहिष्णुता अपने आप में एक तरह की हिंसा है और लोकतंत्र की आत्मा के विकास की राह की सबसे बड़ी बाधा भी” को याद करके ही असहिष्णुता के मुद्दे पर बहुत ही सहिष्णुता के साथ मिट्टी डाली जा सकती है।