इशरत जहाँ मामले में हेडली का बयान कितना सच्चा?

ishrat_jahan-1मानवाधिकार कार्यकर्ता और इशरत की मां का पक्ष रखने वाले शमशाद पठान का कहना है कि हेडली के बयान को लेकर भाजपा नेताओं की ख़ुशी कोई वजूद नहीं रखती क्योंकि जो बात कोर्ट के सामने है, उसे नकारा नहीं जा सकता। शमशाद पठान ने कहा कि हेडली की गवाही से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, इस फर्जी एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों के बयान, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसपी तमांग की जांच, और एसआईटी की रिपोर्ट जिसमें कहा गया कि चार लोगों को पहले ही हत्या कर एनकाउंटर जाहिर कर दिया गया था।

इशरत जहाँ केस में पूर्व डीआईजी डीजी बंजारा की तरफ से अदालत में पैरवी करने वाले सीनियर वकील वीडी गज्जर का कहना है कि इशरत मामले में डेविड कोलमैन हेडली का बयान कोई मायने नहीं रखता क्योंकि उनकी गवाही मुंबई हमलों के संदर्भ में है। पाकिस्तानी-अमरीकी नागरिक हेडली उर्फ सैयद दाऊद गिलानी ने अमरीका से वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिये मुंबई की एक अदालत को कई जानकारियां दी थी। गज्जर ने कहा कि बंजारा की लड़ाई आतंकवाद के खिलाफ थी और उन्हें हेडली जैसे चरमपंथी की मदद और दया की जरूरत नहीं है।

फर्जी मुठभेड़ में शामिल और गुजरात के रिटायर्ड पुलिस उप अधीक्षक डीएच गोस्वामी ने ही बताया था कि लश्कर-ए-तोयबा की स्टोरी 14 जून 2004 के पहले ही लिखी जा चुकी थी और फर्जी मुठभेड़ की इजाजत काली और सफेद दाढ़ी से मिल चुकी थी। यहां उनका इशारा शायद अमित शाह जो गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री थे और मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ था।

शमशाद पठान के अनुसार गुजरात क्राइम ब्रांच ने पहले से चारों व्यक्तियों को मारकर कोतरपुर वाटर वर्क्स पर डाल दिया और मीडिया को बुलाकर यह कहानी बतायी कि ये लश्कर के आतंकवादी थे और नरेंद्र मोदी को मारने के लिए आये थे। लेकिन यह पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। ये बात फर्जी मुठभेड़ में शामिल डीएच गोस्वामी और दूसरे पुलिसवालों के बयान में दर्ज है। 2004 से 2009 तक इस केस की जांच क्राइम ब्रांच के पास थी, लेकिन न ही क्राइम ब्रांच ने और न ही तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी जांच में कोई दिलचस्पी दिखायी। इसके लिए कोर्ट ने जांच एजेंसी की खिंचाई भी की थी।

गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश कल्पेश जवेरी ने इस मुठभेड़ की जांच करने के लिए प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में गुजरात राज्य के तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी गठित की थी। इसी बीच 7 सितंबर 2009 को अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसपी तमांग ने अपनी जांच में पाया कि इन चारों व्यक्तियों की पहले ही हत्या कर दी गयी थी और बाद में एनकाउंटर जाहिर किया गया। उन्होंने इस फर्जी मुठभेड़ के लिए 22 पुलिसवालों को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन सरकार ने मजिस्ट्रेट रिपोर्ट को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली। अगले ही दिन एक अभूतपूर्व घटना में गुजरात हाईकोर्ट में रात के आठ बजे तक चली सुनवायी में तमांग के रिपोर्ट पर स्टे लगा दिया गया।

इस पर पीड़ितों की तरफ से जस्टिस जवेरी के स्टे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवायी करते हुए न सिर्फ स्टे हटाया, बल्कि गुजरात हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि इस केस की सुनवायी के लिए डिवीजन बेंच का गठन करे। जिस पर गुजरात हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच की बनायी हुई एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया कि क्राइम ब्रांच की लश्कर-ए-तोयबा की स्टोरी फर्जी है और चारों लोगों को पहले ही हत्या कर एनकाउंटर जाहिर कर दिया गया था। यह रिपोर्ट आईपीएस राजीव रंजन वर्मा, मोहन झा और सतीश वर्मा ने दी थी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने पूरी जांच के लिए मामला सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने इस मामले की जांच कर पूर्व आईबी चीफ राजेन्द्र कुमार सहित कुल 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। सीबीआई की जांच में सामने आया कि आईबी और गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने फर्जी कहानी बनाकर हत्या जैसे गुनाह को अंजाम दिया और गुजरात के 12 से ज्यादा पुलिसवालों ने सीआरपीसी की धारा 164 के मुताबिक निवेदन दिया कि लश्कर-ए-तोयबा की पूरी फर्जी कहानी इन चारों लोगों की मौत के पहले ही लिखी जा चुकी थी। अभी तक केंद्र की भाजपा सरकार ने आईबी अधिकारियों के खिलाफ केस चलाने की अनुमति नहीं दी है।

सवाल यह है कि क्या हेडली का बयान एसआईटी, सीबीआई, मजिस्ट्रेट जांच और मुठभेड़ में शामिल पुलिसवालों के बयान से ज्यादा अहम है? राजेंद्र कुमार जिन पर इशरत और 3 लोगों की हत्या जैसे संगीन आरोप में चार्जशीट हो चुकी है का कहना है कि मोदी को फंसाने के लिए इशरत के एनकाउंटर को फर्जी बताया जा रहा है।

शमशाद पठान कहते हैं कि तराजू के एक पलड़े में हेडली है और दूसरे में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और सीबीआई। लेकिन भाजपा नेताओं को सिर्फ हेडली की आवाज ही सुनायी दे रही है। सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई ने इस मुद्दे पर क्या कहा है, उन्हें वो भी सुनना पड़ेगा।