फर्जी विडियो के आधार पर देशद्रोह का मामला- फोरेंसिक जांच

kanhaiya_granted_bailदेशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किये गये जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने छह महीने की अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने कन्हैया को 10,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी। साथ ही न्यायालय ने कन्हैया पर कुछ शर्तें भी लगायी हैं। हाईकोर्ट ने जमानत की शर्तों में कहा कि कन्हैया कुमार को जांच में सहयोग करना होगा। जेएनयू के शिक्षक कन्हैया की जमानत देंगे।

जेएनयू के जिन विडियो के आधार पर देशद्रोह के आरोप लगाये गये वे विडियो सच्चे नहीं है। यह खुलासा दिल्ली सरकार की ओर से करायी गयी फोरेंसिक जांच में हुआ है। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो में हिंसा को भड़काने वाले शब्दों को जोड़ा गया है। जांच में यह भी पाया गया है कि किसी भी वीडियो में ‘’पाकिस्तान जिंदाबाद’’ की नारेबाजी नहीं है। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो में हिंसा को भड़काने वाले शब्दों को जोड़ा गया है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने हैदराबाद स्थित ट्रुथ लैब के पास सात वीडियो भेजे थे। लैब के चेयरमैन केपीसी गांधी ने बताया है कि इनमें से दो सबसे विवादास्पद वीडियो से बेहद चालाकी से  ‘छेड़छाड़’ की गयी है और इसमें आवाजें डाली गयी हैं। उन्होंने कहा कि वीडियो में निरंतरता नहीं है और आवाज कहीं और से ‘जोड़ी’ गयी है। यदि हमें वायस सेंपल मुहैया कराये जायें तो यह भी बताया जा सकता है कि किसकी आवाज ‘जोड़ी’ गयी है।

‘छेड़छाड़’ वाले ये वीडियो 9 और 11 फरवरी के हैं। यह पाया गया है कि इन वीडियो का स्रोत यूट्यूब और ट्विटर है। गांधी के अनुसार, चालाकी से तैयार इन क्लिप्स में, वीडियो को एडिट किया गया है और आवाज ‘जोड़ी’ गयी है। गौरतलब है कि जेएनयू परिसर में 9 फरवरी को हुए विवादास्पद कार्यक्रम में भारत विरोधी नारेबाजी की गयी थी। आरोप है कि यह कार्यक्रम संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर लटकाये जाने की बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।

मामले में जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने 13 फरवरी को इस कथित नारेबाजी के मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये थे। जेएनयू की ओर से स्वतंत्र रूप से अपनी आंतरिक जांच के तहत छह वीडियो सैंपल ट्रुथ लैब भेजे गये थे। गौरतलब है कि कन्हैया कुमार के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि कन्हैया ने कोई नारेबाजी नहीं की और उसे चेहरा कवर किये हुए शख्स से आइडेंटिटी कार्ड के बारे में पूछताछ करते हुए देखा जा सकता है। कन्हैया को आईपीसी की धारा 124 ए (देशद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज मामले में 12 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने भारत विरोधी नारेबाजी में कन्हैया की सक्रिय भूमिका को लेकर अदालत ने पुलिस को उनके खिलाफ सबूत दिखाने को कहा। कन्हैया ने भी मामले में गिरफ्तार किये गये दो अन्य आरोपी उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य से अपने को अलग कर लिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कन्हैया को जमानत देने को अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान कन्हैया के वकील ने कहा कि छात्र नेता ने देश के खिलाफ कभी नारेबाजी नहीं की जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा  कि सबूत हैं कि उन्होंने और अन्य ने भारत विरोधी नारेबाजी की और वे अफजल गुरू के पोस्टर थामे हुए थे। पुलिस ने दावा किया था कि कन्हैया जांच में सहयोग नहीं कर रहे और खुफिया ब्यूरो और दिल्ली पुलिस की संयुक्त पूछताछ में विरोधाभासी बयान आये। न्यायिक हिरासत में मौजूद कन्हैया ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के जरिये कहा कि परिसर के अंदर नकाबपोश लोगों ने भारत विरोधी नारे लगाये।

कल न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने जेएनयू कैंपस के भीतर बीते नौ फरवरी को हुए कार्यक्रम में भारत विरोधी नारेबाजी के आरोपों का सामना कर रहे कन्हैया की जमानत याचिका पर तीन घंटे तक सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।