‘आख्यान’: सचिन दा की याद और मुंशी प्रेमचंद की ईदगाह

idgah_2जयपुर 16 मार्च। स्थानः रवीन्द्र मंच स्टूडियो थियेटर। छोटा ही सही, लेकिन खचाखच भरा स्टूडियो इस बात का गवाह रहा कि नाटक तथाकथित रंगमंचकर्मियों की बपौती नहीं है। नेत्रविहीन बालकों ने नाट्य तकनीक के पहलुओं को जिस समर्पण से अपनाया कि प्रेक्षागृह में बैठे सभी दर्शक भावविभोर हो गये। ‘सेंस ऑफ डायरेक्शन’ और ‘परफेक्ट ब्लॉकिंग’ ऐसी थी कि लगा ही नहीं कि ये बच्चे दृष्टिबाधित हैं। सम्वादों में कोई भूल चूक नहीं हुई। सभी कलाकारों को अपने अपने पात्रों के सम्वाद ऐसे याद थे मानों वे नाटक नहीं कर रहे, जैसे यह उनकी जिंदगी का हिस्सा हो।

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ को विश्व की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में माना गया है। आख्यान संस्था और कला एवं संस्कृति विभाग राजस्थान के सहयोग से आयोजित किये जा रहे दो दिवसीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन नाटक ‘जश्न-ए-ईद’ की प्रस्तुति हुई। मुंशी प्रेमचंद की ‘ईदगाह’ पर आधारित इस नाटक की परिकल्पना एवं रूपांतरण भारत रत्न भार्गव ने किया।

हामिद ईद के मेले में अपने लिए खिलौने या मिठाई की बजाय अपनी बूढ़ी दादी के लिए चिमटा खरीदता है क्योंकि दादी का हाथ अक्सर रोटी बनाते जल जाता है। संवेदना का यही भाव इस कहानी को विश्व की सर्वश्रेष्ठ कहानी का दर्जा दिलवा चुका है। नाटक का निर्देशन भारत रत्न भार्गव और अशोक बांठिया ने किया। संगीत निर्देशन और पार्श्वगायन किया डॉ प्रेम भण्डारी ने।

दृष्टिहीन इन बालको का आत्मविश्वास देखते ही बनता है। एक बालिका ललिता मीणा ने बातचीत में कहा, ‘‘बड़ा काम करने के लिए दृष्टि नहीं दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।’’

इससे पूर्व 15 मार्च को शहर के कला प्रेमियों ने संगीत, रंग और रंगकर्म का एक साथ लुत्फ उठाया। आख्यान संस्था की ओर से रवींद्र मंच पर शुरू हुए दो दिवसीय रंगधर्मी नाट्य उत्सव के पहले दिन संगीतकार एसडी बर्मन पर केंद्रित नाट्य, नृत्य, संगीत एवं चित्रकला के माध्यम से कार्यक्रम ‘‘सुन मेरे बंधु रे’’ की प्रस्तुति की गयी। अशोक बांठिया के निर्देशन में हुए कार्यक्रम में गुरमिंदर सिंह पुरी, अजय जैन और जनकृति तथा खुद बांठिया ने प्रस्तुति दी।

इस प्रस्तुति में चित्रकार विनय शर्मा ने एसडी बर्मन के गीतों में प्रकृति के वर्णन को कैनवास पर जीवंत किया। विनय की बनायी ऑन स्पॉट पेंटिंग की कलात्मकता देखने योग्य थी। इस दौरान कलाकारों ने एसडी बर्मन के सुपरहिट गीत सुनाये और उन पर नृत्याभिनय कर बॉलीवुड के सुनहरे युग को जीवंत कर दिया। इस प्रस्तुति में सैट और प्रकाश परिकल्पना ऋतुराज देवांग और अजय जैन की थी।

यहां यह बताना जरूरी है कि आख्यान संस्था के सचिव रवि झांकल हैं जो फिल्म और टेलीविजन के लोकप्रिय कलाकार है। जयपुर से रंगकर्म की शुरुआत करने वाले रवि झांकल ने अपने शहर से जुड़े रहने के लिए जयपुर में इस संस्था की स्थापना की और पिछले तीन वर्षों में चार नाट्य समारोहों में कई नाटक प्रस्तुत किये।