जिओ की सफलता इतनी आसान नहीं

jioरिलायंस जियो के लॉन्च होने के बाद टेलिकॉम कंपनियों में घमासान मच गया है। देश की अन्य बड़ी टेलिकॉम कंपनियों एयरटेल, आईडिया और वोडाफोन के लिए रिलायंस का मुकाबला करना लगभग असम्भव है। मुकेश अम्बानी की रिलायंस जियो का प्रमुख लक्ष्य भारत में एक ऐसे हिस्से तक पहुंचना है जिनके पास इन्टरनेट की पहुंच नहीं है। मुकेश अम्बानी के इस अभियान में सरकार का साथ मिलना भी लाजमी है क्योंकि प्रधानमंत्री खुद देश में ‘डिजिटल इंडिया’ का नारा पहले ही दे चुके हैं। रिलायंस जियो के विज्ञापन में प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपनों का जिक्र किया भी गया है। ट्राई की माने तो भारत की 125 करोड़ की आबादी में इन्टरनेट की पहुँच अभी सिर्फ 32 फीसदी लोगों तक ही है। यानी देश के 90 करोड़ लोग अभी भी इन्टरनेट से दूर हैं और शायद कारण भी यही है कि रिलायंस इन्टरनेट के साथ सस्ता 4जी देने की भी योजना बनायी है।

रिलायंस फ़िलहाल भारत के उस बाजार तक पहुंचना चाहती है जहाँ इन्टरनेट नहीं है और उसके लिए वह अभी बिना कमाई के अपने जेब से खर्च करने को तैयार है। जानकारों की माने तो रिलायंस को ऐसे में फिलहाल अपने 60000 कर्मचारियों को बिना कमाई के पैसा देना पड़ेगा। हालांकि सेलुलर ऑपरेटर्स ऑफ़ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज का कहना है कि जिओ की तरफ से जारी किये गये फ्री कॉलिंग को जिस तरह फ्री समझ जा रहा है, वह है नहीं। उनका कहना है कि इसमें वॉइस कालिंग को डेटा के साथ जोड़ा गया है। यानी जब आप डेटा खरीदेंगे तो आपको कॉल फ्री मिलेगी। उन्होंने कहा आपको यह समझने की जरूरत है कि जियो जिस तकनीक का इस्तेमाल फ्री कालिंग में कर रहा है उसमे नेटवर्क के जरिये डॉयल की गयी वॉइस कॉल भी डेटा की खपत करेगी।

रिलायंस पहले भी इस बात को लेकर ट्राई के पास जा चुके है कि एयरटेल, आईडिया और वोडाफोन जैसी अन्य कंपनियां उसे जानबूझ कर इंटर कनेक्शन उपलब्ध नहीं करा रही है। रिलायंस का कहना है कि यह लाइसेंस नियमों के खिलाफ है। ट्राई की रिपोर्ट की माने तो जियो का कॉल ड्रॉप 65 प्रतिशत के ऊपर है। वोडाफोन, आइडिया और एयरटेल से रिलायंस जियो के 1.6 करोड़ से ज्यादा कॉल फेल हो चुके हैं।