दो सौ नुक्कड़ नाटकों की श्रृंखला की पहली कड़ी ‘दस्तक’

Jai Nukkad_14-11_Dastakजयपुर। पिछले रविवार 13 नवम्बर दोपहर 3 बजे से रामनिवास बाग स्थित सफदर हाशमी चौक से नुक्कड़ नाटकों के सोलह दिवसीय समारोह की शुरुआत हुई। सफदर हाशमी रंग जगत में नुक्कड़ नाटकों के प्रणेता माने जाते हैं। उन्होंने नुक्कड़ नाटक करते हुए ही अपने प्राण त्याग दिये थे। इस मौके पर रंग मस्ताने ग्रुप के डायरेक्टर अभिषेक मुद्गल के निर्देशन में तीस कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक ‘दस्तक’ का मंचन किया।
इसका उद्घाटन थ्री एम डॉट बैंड के चेयरमैन नरेंद्र गौड़ और समारोह के फाउंडर डायरेक्टर दीपक गेरा ने किया। इस समारोह के तहत शहर में हर रोज विभिन्न समसामयिक समस्याओं पर दिन भर अलग-अलग जगह नुक्कड़ नाटक किये जा रहे हैं।
महिलाओं की आजादी के लिए कई लोगों ने आवाज उठायी है, लेकिन इस आवाज को ‘दस्तक’ ने बुलंद किया। अल्बर्ट हॉल और रामनिवास बाग स्थित सफर हाशमी चौक में रंग मस्ताने ग्रुप की टीम ने लोगों का ध्यान खींचा और देखते ही देखते भीड़ जुट गयी।
नाट्य निर्देशक अरविंद गौड़ द्वारा परिकल्पित यह नाटक जयपुर के अभिषेक मुद्गल के निर्देशन में औरतों के हक में नुक्कड़ नाटक ‘दस्तक’ के जरिये लोगों के दिलों में दस्तक देने की बेहतरीन कोशिश की। नाटक में महिलाओं के साथ होने वाली रोजाना की छेड़छाड़ भी मिली तो उन्हें घूरने वाले और बच्चियों तक को परेशान करने वाले चेहरे भी दिखे। जयरंगम समारोह के तकनीकी निर्देशक नरेंद्र अरोड़ा ने बताया कि ‘स्लटवॉक’ बेशर्मों के खिलाफ चला कैंपेन है जिसकी हर शहर में जरूरत है। दिल्ली में ही कितने रेप हुए लेकिन सजा कितनों को हुई? विरोध होगा तो ही लोग सोचेंगे। घर में बेटियों को नसीहत देने से ज्यादा बेटों को महिलाओं की इज्जत करना सिखाना जरूरी है। नाटक में यह बताने की कोशिश की गयी कि औरत की जिंदगी पर उसका हक है, तो कैसे किसी को हक बनता है कि उसे घूरे, उसे छेड़े या उससे रेप करे।