फ्राइडे थिएटर में चाणक्य

Play_RM_12-11_Vishnuguptaजयपुर। स्थान-रवींद्रमंच। फ्राइडे थिएटर में इस बार वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक राही लिखित और निर्देशित नाटक ‘विष्णुगुप्त चाणक्य’ का मंचन किया गया। राही ने इसमें चाणक्य से जुड़े कई रोचक तथ्यों को उजागर किया। ओजस्वी संवाद और कलाकारों के चाणक्य काल के गौरवमयी परिधानों से सजी इस प्रस्तुति में चाणक्य की चणक नीति के पहलुओं से दर्शकों को रूबरू होने का मौका मिला। इसमें बताया गया कि चाणक्य पर अपने पिता चणक और मां द्रमिला का प्रभाव था। उन्होंने अपने पिता के विचारों को चणक नीति के रूप में प्रचारित किया।
नाटक के पहले दृश्य में दिखायी देता है उनके पिता का आश्रम जहां एक लड़की से जबर्दस्ती करने वाले को देश निकाला दिया जाता है। पिता के इस निर्णय का प्रभाव चाणक्य पर पड़ता है और वो तक्षशिला से अध्ययन कर सिकंदर को देश से निकालने के लिए मगध आते हैं। इसके बाद शुरू होता है उनकी नीतियों का संघर्ष। अंत में वो एक आदिवासी शूद्र युवक सिंह रण को मगध का नरेश बनाने के लिए आगे लाते हैं। वो घोषणा करते हैं कि सिंह रण अपनी मां के नाम से पहचाने जायेंगे, उनका नाम होगा चंद्रगुप्त, चूंकि उनकी मां का नाम मुरा है इसलिए वो मौर्य कहलाएंगे। इस तरह चाणक्य ऐसे पहले नीति-निर्माता बने जिसने व्यक्ति के जीवन में मां को अहमियत दी। चाणक्य के रूप में जयपुर थिएटर के वरिष्ठ अभिनेता अनिल भागवत का अभिनय केंद्र में रहा। इसके अलावा सुनील शर्मा, रुचि गोयल, योगश जांगिड़ और अपेक्षा जैन सहित जयपुर थिएटर के कई नये चेहरों ने अभिनय किया।