राजनैतिक ‘बिसात’ पर लाशों की राजनीति

2016_11_18-Bisatजयपुर। 18 नवम्बर। स्थान रवींद्रमंच। ‘‘राजनीति जनता की भलाई के लिए होनी चाहिए’’ चाणक्य के इस आप्त वाक्य को वरिष्ठ रंगकर्मी हेमंत थपलियाल अपने नाटक ‘बिसात’ में विभिन्न घटनाक्रमों और संवादों से स्थापित करने का बेहतरीन प्रयास किया है। हेमंत ने इसके जरिये आज की राजनीतिक परिस्थितियों का मंथन भी किया और आज के राजनीतिज्ञों के चरित्र और जनता के प्रति उनकी थोथी सोच का पोस्टमार्टम कर डाला है। जयपुर में इसका यह दूसरा शो था। इस नाटक में इस बात को स्थापित किया गया कि चाणक्य का यह सूत्र आज की परिस्थितियों में मात्र एक जुमला बन कर रह गया है।

नाटक में बताया गया कि इस अव्यवस्थित तंत्र में मेडिकल जैसी सीट चंद रुपयों की खातिर दूसरे को दे दी जाती है जिसकी वजह से एक योग्य लड़का चयन से रह जाता है और वह आत्महत्या कर लेता है। जिन रसूखदारों को रुपयों के बल पर वो सीट मिली उसकी तरफ सत्ता है, प्रशासन है और प्रशासन शासन भी साथ दे रहा है। उसका मित्र अमेरिका से आता है और उसकी मृत्यु से उद्धेलित होता है। वो संघर्ष का ऐलान करता है और शुरू हो जाता है राजनेताओं का लाश पर रोटी सेंकने का अभियान। नाटक में इन्हीं सबको हेमंत ने कम से कम स्टेज प्रॉपर्टी के माध्यम से प्रभावी अंदाज में संप्रेषित किया। नाटक घटना प्रधान था जिसमें संवाद में घटनाएं प्रदर्शित हो रही थी।