जयरंगम-2016: दर्शकों की कमी से जूझता दूसरा दिन

Birla Auditoriumजयपुर। जयरंगम 2016। बिरला सभागार। 22 नवम्बर। जयरंगम में दूसरे दिन एक बार फिर दर्शकों की कमी खल रही थी। शायद देश में विमुद्रीकरण का कहर कला और संस्कृति पर इस तरह ही पड़ना था। इस दिन कुछ अच्छे बुरे नाटकों से साबका पड़ा। जवाहर कला केन्द्र के रंगायन में 11बजे मुकेश वर्मा का ‘आला अफसर’ और 4बजे राजेन्द्र पायल का ‘तलवार’, महाराणा प्रताप सभागार में कंचन उज्ज्वल का ‘डोंट ड्रेस फॉर डिनर’ का मचन हुआ। मुख्य प्रदर्शन बिरला सभागार में सायं 7 बजे रंगबाज के इमरान रशीद का नाटक ‘बड़े मियां दीवाने’ का मचन हुआ।

आला अफसर

जवाहर कला केंद्र में आश दर्शन कला संस्थान द्वारा मुद्रा राक्षस के नाटक ‘आला अफसर’ का मंचन मुकेश वर्मा सोनी के निर्दंशन में किया गया। इस नाटक में नौटंकी की कुछ ख़ासियतों को शामिल किया गया। मुकेश स्वयं संगीतकार हैं इसलिए नाटक में दोहों, चौबोलों, लावणी और कव्वालियों का प्रयोग किया।

सरकारें बदलती रहती है लेकिन देश के प्रशासन में राजनेताओं और नौकरशाहों का सम्बन्ध सदैव ही शोषण का बायस बनते हैं। ‘आला अफसर’ देश के नाट्य प्रेमियों में बहुत लोकप्रिय रहा है। कई नाट्य समूहों ने इसका मंचन किया है। बम्बई के थियेटर जगत में इस नाटक की प्रस्तुतियों कई बार हो चुकी है।

कलाकार- केशव लोकवानी, अमन कूलवाल, अर्पित शर्मा, भरत साई, अमरदान चारण, नीरज करोड़िया, गगन शर्मा, निकिता वर्मा, प्रियंका शर्मा, देव शर्मा, रूही भारद्वाज, मनीश कसाना, संजय चारण, जुनैद ख़ान, ऐजाज़ ख़ान, अमित खूंटेटा, अखिलेश

परेदे के पीछे- उमर ख़ान, निखिल भारद्वाज, नरीन चौहान, नीरज चौहान, अंशुल शर्मा, अंकित शर्मा, विमल
मेकअप- असलम ख़ान, मंच प्रबंधक- रमन पारीक, प्रकाश- कपिल कुमार, संगीत- राहुल धालिया, कालू भाई कानपुरवाले, मुकेश खाण्डे, बच्चूसिंह सोनी

डोन्ट ड्रेस फॉर डिनर

JaiRangam_22-11_dont dress for dinnerजयरंगम के दौरान सांझा सपना के कंचन उज्जवल निर्देशित ‘डोन्ट ड्रेस फॉर डिनर’ का मंगलवार को महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में मंचन किया गया। पति, पत्नी और वो का रिश्तों पर आधारित रोचक नाटक दर्शक को सहजता से जोड़ने में कामयाब रहा। बनार्ड अपनी पत्नी के बाहर जाने पर अपनी प्रेमिका के साथ वीकेंड मनाने का प्लान बनाता है लेकिन तभी उसका बेस्ट फ्रेंड रॉबर्ट शहर में आता है। बनार्ड को लगता है यह अच्छा बहाना बन सकता है तो वह उसे अपने यहां ठहरने के लिए बुला लेता है। हालांकि बनार्ड नहीं जानता कि रॉबर्ट और उनकी पत्नी जैकलीन के बीच भी अफेयर चल रहा है। जैसे ही जैकलीन को पता लगता है कि बनार्ड आ रहा है तो वो अपना जाना कैंसिल कर देती है। यहां से शुरू होता है, एक-दूसरे को गुमराह करने का पेचीदा सिलसिला जो दृश्य दर दृश्य दर्शकों का मनोरंजन करता हुआ अपने मुकाम पर पहुंच कर खत्म होता है।

कलाकार- सोनाली शर्मा, आरती नायर, प्रियंका लुल्ला और अधिराज शर्मा।

तलवार
JaiRangam_22-11_Rajendra Payalराजेंद्र सिंह पायल द्वारा लिखित और निर्देशित ‘तलवार’ एक मनोरंजक नाटक है। पांच मिनट की एक बात पर एक घंटे का नाटक बन गया और ये सब संभव हुआ राजस्थान में छिपे अकूत कथा भंडारों की वजह से। गांव में एक नाई ठाकुर की जोड़ी है, इनके पास दूसरों को ठगने के अलावा कोई काम नहीं है। इनके पास एक तलवार है, जिसकी कीमत चार सौ रुपए है। ये गांव के सेठ को झूठ बताते हैं कि ये तलवार एक एंटीक पीस है इसकी कीमत 15,000 रुपये है, आज सख्त जरूरत है, आप 5,000 रुपए दे दो, हम जल्द ही इसे वापस छुड़ा लेंगे। सेठ के कई तकादे करने पर भी तलवार नहीं छुड़ाये जाने से सेठ चिंतित होता है। लुहार को पूछने पर सेठ की आंखें फटी रह गयी कि इसकी कीमत तो सिर्फ 400 रुपये है। सेठ ने इसका जिक्र अपनी पत्नी से किया, सेठानी शहर की पढ़ी-लिखी तेज-तर्रार महिला है। वह सेठ को इस मुसीबत से छुटकारा दिलवाने का बीड़ा उठाती है। पायल ने इन सब वाकयों को हास्य की जाजम पर इस तरह सजाया कि पूरा नाटक हंसी का एक बेहतरीन दस्तावेज बन गया।
कलाकार- विनोद सोनी, अभिजीत सैन, अनिल मारवाड़ी और श्याम बिहारी शर्मा।

बड़े मियां दीवाने
22-11_Bade Miya Deevaneएक समय था जब मन्नू भण्डारी का ‘महाभोज’, धर्मवीर भारती का ‘अंधा युग’, मोहन भण्डारी का ‘आधे अधूरे’ और इसी तरह के नाटक खेले जारहे थे तब दिल्ली में ‘चढ़ी जवानी बुड्ढे नूं’ जैसे फूहड़ नाटक भी खेले जारहे थे। फिल्म और नाटक में मूल यही अंतर समझा जाता था कि एक का प्रयोजन महज़ मनोरंजन और दूसरे का मकसद विचार के स्तर पर आंदोलित करना भी है। ‘बड़े मियां दीवाने’ मनोरंजन तो करता है लेकिन नाटक देख कर ना तो उत्तेजना होती है नाही सुकून मिलता है। हां, ‘चढ़ी जवानी बुड्ढे नूं’ जैसा मनोरंजन अवश्य होता है।

उम्रयाफ्ता ‘मीर साहब’ पड़ौस के ‘शेख साहब’ की जवान लड़की से मुहब्बत करने लगते हैं और शादी करना चाहते हैं और वो लड़की और मीर साहब’ के साहबज़ादे ‘ताबिश मियां’ पहले ही इश्क में गिरफ्तार हैं। ‘मीर साहब’ पहले ही दो तवायफों से अपना चक्कर चलाये हुए हैं जो उनकी दौलत के चक्कर में हैं।

‘शौकत मियां’ ‘मीर साहब’ के मुंह लगे भी हैं और ‘मीर साहब’ हर मामले में ‘शौकत मियां’ से मशवरा करते हैं और चाहते हैं कि ‘शौकत मियां’ ‘शेख साहब’ से बात करें और रिश्ता कायम करें। रंगबाज के निर्देशक इमरान रशीद नाटक में ऐसी परिस्थितियां रचते हैं कि ‘मीर साहब’ के इश्क के चक्कर में ‘शौकत मियां’ खुद चकरघिन्नी हो जाते हैं।

कलाकार- इमरान रशीद- मीर साहब, पवन उत्तम-शौकत, फारूख़ सेयर-चिल्ले ख़ान, गगन देव-ताबिश, निशि दोषी, मुजम्मिल क़ुरेशी-शेख, सारिका सिंह-शेखानी, पार्वती निर्बान-गुलाब जान, रुख्सार कबीर-हीरा बाई

प्रकाश- नितिन शर्मा, संगीत-विशाल, प्रणीता पाण्डुरंग, संगीत संयोजन-मोहित अगरवाल