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विषमता की बढ़ती खाई

विषमता की बढ़ती खाई

-राजाराम भादू-ढलती बीसवीं सदी के नवें दशक में भूमण्डलीकरण और आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत में कहा गया था कि इससे विकास का चक्र तेजी से घूमेगा। यह भी दावा था…

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