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बर्फ और आग़

बर्फ और आग़

हिन्दी कविता में निदा नवाज़ को कम ही लोग जानते हैं लेकिन उनकी कविता का अपना एक विशेष स्थान है। निदा कश्मीर की प्रकृति और…

ऐसा देश है मेरा!  सोणा देश है मेरा!

ऐसा देश है मेरा! सोणा देश है मेरा!

देखने से भले ही कहीं से न लगता हो, पर यह सच है कि आज़ादी के लिहाज से अपना देश सत्तरवें साल में प्रवेश कर…

वो अंतिम मोड़ था इस ज़िन्दगी का

वो अंतिम मोड़ था इस ज़िन्दगी का

पता मुझको मिला बस दुश्मनी का, बढ़ाया हाथ जब-जब दोस्ती का। भला मुझमें कोई कैसे ठहरता , नहीं था मैं ही शायद घर किसी का।…

खुद में रह कर रहे गुमशुदा उम्र भर

खुद में रह कर रहे गुमशुदा उम्र भर

जिनसे हमको मिली ना वफ़ा उम्र भर, उनको देते रहे हम दुआ उम्र भर। ना ख़बर, ना पता, ना भरोसा मगर, उसका देखा किये रास्ता…

सैलाब भी उठने थे,तूफ़ान भी आना था

सैलाब भी उठने थे,तूफ़ान भी आना था

कुछ कसमें निभानी थीं,कुछ फ़र्ज़ निभाना था, दस्तूर निभाने को ,सर अपना झुकाना था. सजदा था मुकद्दर में ,सर को तो झुकाना था, सर उनका…