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एक फौजी का इकबालिया बयान

एक फौजी का इकबालिया बयान

‘मेरे हाथ ख़ून से रंगे हैं‘ एक गुमनाम फौजी अफसर का इकबालिया बयान है जिसे कलमबद्ध किया है लेखक और पत्रकार किश्लय भट्टाचार्य ने। किश्लय…

‘जंगलनामा’-आदमी से आदमी तक

‘जंगलनामा’-आदमी से आदमी तक

‘जंगलनामा’-आदमी से आदमी तक की यात्रा ‘जल, जंगल, जमीन हमारा है’ यह आदिवासियों का राजनीतिक नारा मात्र नहीं है, भले ही इसका रास्ता राजनीति हो।…

मृत्यु के पश्चात: ‘अपने भी अजनबी’

मृत्यु के पश्चात: ‘अपने भी अजनबी’

अब न तो अज्ञेय रहे और नाही उनका साहित्य पढ़ने वालों का महान वर्ग मौजूद है लेकिन नयी पीढ़ी के पाठकों को समय समय पर…